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युवा प्रतिभाओं ने बीकानेर की समृद्ध कला परंपरा को नवीन ऊंचाईयां प्रदान की है

युवा प्रतिभाओं ने बीकानेर की समृद्ध कला परंपरा को नवीन ऊंचाईयां प्रदान की है
बीकानेर। नगर स्थापना दिवस के अवसर पर होने वाले आयोजनों की श्रृंखला में 537वें स्थापना दिवस पर आयोजित 7 दिवसीय ‘उछब थरपणा’ के तहत आज समारोह के छठे दिन दो दिवसीय ‘युवा कला प्रदर्शनी’ का उद्घाटन नत्थूसर गेट बाहर लक्ष्मीनाराण रंगा सृजन सदन में हुआ।
‘युवा कला प्रदर्शनी’ के मुख्य अतिथि डॉ. नितिन गोयल निदेशक अभिलेखागार ने उद्घाटन अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुखद अवसर है कि बीकानेर की युवा प्रतिभाएं हमारी लोक परंपरा, लोक संस्कृति एवं लोक कलाओं की समृद्ध परंपरा से जुड़े रहकर बीकानेर की समृद्ध कला साधना को नवीन ऊंचाईयां प्रदान की है।  अध्यक्षता करते हुए कमल रंगा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कला एक व्यापक शब्द है जिसका उपयोग रचनात्मक या कल्पनाशील प्रतिभाओं का उपयोग करके बनाए गए विभिन्न को दर्शाने के लिए किया जाता है जिनमे एक सार्थक अनुभव उत्पन्न करने की उम्मीद होती है, इन्हीं उम्मीदों पर यह कला प्रदर्शनी खरी है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण युवा प्रतिभाओं द्वारा विभिन्न कलाओं का मन मोहक का चित्रण है।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ कला विशेषज्ञ डॉ. राकेश किराडू ने बताया कि दो दिवसीय कला प्रदर्शनी एक नवाचार है। क्योंकि इसमें 20 कलाओं यथा राजस्थानी आर्ट, पोट्रेट, उस्ता आर्ट, मॉर्डन आर्ट, मधुमनी आर्ट, बणीथणी आर्ट, फड़ आर्ट, पिछवाई आर्ट, स्कैच आर्ट, कैंडल आर्ट, बुल आर्ट, मथेरन आर्ट, साफा-पाग, पगड़ी और चंदा आर्ट, परंपरागत आर्ट, मिनीएचर आर्ट का शानदार एवं महत्वपूर्ण प्रदर्शन युवा प्रतिभाओं ने किया है जो अपने आप में बीकानेर के कला इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना है।
उछब थरपणा समारोह के संयोजक वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी एवं शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि हमारी कलाएं और लोककलाएं पूरे देश में विशेष पहचान रखती है। जिसका अनुपम उदाहरण प्रदर्शनी में लगी सैकड़ों कलाकृतियां हैं। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण ‘युवा कला प्रदर्शनी’ के 35 कलाकारो का संस्थाओं की ओर से कल समारोह के सातवे दिन समापन अवसर पर सम्मान किया जाएगा।

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