Bikaner Bikaner District

हरियालो राजस्थान के तहत वृक्षारोपण और पौधशाला तकनीकी तैयारी कार्यशाला आयोजित

हरियालो राजस्थान के तहत वृक्षारोपण और पौधशाला तकनीकी तैयारी कार्यशाला आयोजित
बीकानेर। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की बिंदु संख्या 45(1) के तहत हरियालो राजस्थान को साकार करने हेतु वन मंडल छतरगढ़ में पौधारोपण एवं पौधशाला में पौध तैयारी पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता उप वन संरक्षक श्री दिलीप सिंह राठौड़ ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ लेखाधिकारी श्री देवेंद्र सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। क्षेत्रीय वन अधिकारी बेरियावली श्रीमती विजय लक्ष्मी ने पौधशाला में पौध तैयारी पर तकनीकी जानकारी साझा की। साथ ही क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री योगेंद्र सिंह राठौड़ ने फॉरेस्ट में फील्ड स्टाफ के कर्तव्यों पर व्याख्यान दिया एवं 11 जून को होने वाली वन्यजीव गणना पर ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
रेंजर भरवेन्द्र सिंह द्वारा प्लस ट्री की पहचान कर उनके चयन में बरती जानी तकनीक की जानकारी दी गई। फॉरेस्टर अनिल बिश्नोई ने खींप तथा फोग की झाड़ियों में खेजड़ी के बीज की बुवाई कर खेजड़ी के पौधे तैयार करने के नवाचार के बारे मे प्रतिभागियों को जानकारी दी। प्रवीण बिश्नोई द्वारा सीड बॉल बनाने की विधि तथा उन्हें किस प्रकार वन क्षेत्रों में लगाया जाएगा के बारे मे विस्तार से बताया गया। वन भूमि के रिकॉर्ड संधारण में वनखंडों की फाइल तैयार करने में बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में वन रक्षक प्रिंयका द्वारा बताया गया।
पौधशाला में पौधों को होने वाली बीमारियों व उसके समाधान के बारे क्षेत्रीय वन अधिकारी छत्तरगढ़ द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई।
पौधशाला में गुणवत्ता के पौधे तैयार करने के लिए अपनाई जाने वाली तकनीक के बारे में जानकारी दी गई।कार्यशाला की आवश्यकता पर क्षेत्रीय वन अधिकारी सत्तासर श्री बाबू लाल और क्षेत्रीय वन अधिकारी छतरगढ़ ने श्री प्यारे लाल ने भी विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में उप वन संरक्षक ने वृक्षारोपण की सही विधि का लाइव डेमो प्रस्तुत किया और इस वर्ष के वृक्षारोपण को सफल बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों को अग्रिम बधाई दी।कार्यक्रम का संचालन सहायक लेखाधिकारी श्री मदन मेघवाल ने किया।
कार्यशाला का उद्देश्य हरियालो राजस्थान अभियान को सफल बनाने के लिए वन कर्मचारियों को वृक्षारोपण एवं पौधशाला की तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि आगामी वृक्षारोपण में सफलता प्राप्त की जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *