

प्रभु की लीला में छिपा है आध्यात्मिक रहस्य
बीकानेर। गोपेश्वर महादेव मंदिर गंगाशहर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सात दिवसीय श्री राम कथामृत का भव्य आयोजन किया गया है। जिसमें संस्थान के संस्थापक एवं संचालक आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री त्रिपदा भारती जी ने कथा के तृतीय दिवस में बाल लीला प्रसंग का वर्णन किया। कथा का शुभारंभ महावीर जोशी, घनश्याम गर्ग, जगदीश गर्ग के द्वारा पूजन से किया गया । साध्वी जी ने कहा कि प्रभु श्री राम ने जन कल्याण के लिए त्रेता युग में अवतार लिया। प्रभु जब कोई कार्य करते हैं तो वह लीला कहलाती है। प्रभु द्वारा की गई प्रत्येक लीला में आध्यात्मिक रहस्य छिपे होते हैं। प्रभु की लीला दिव्य होती है। साधारण मानव उन लीलाओं को समझ नहीं पाते क्योंकि हम अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हैं लेकिन प्रभु बुद्धि का विषय ही नहीं है। कथा प्रसंग के माध्यम से साध्वी ने बताया कि प्रभु श्री राम सभी के अंतः करण को प्रकाशित करने वाली एक शक्ति है। जिसकी विषय में कबीर दास जी ने अपनी वाणी में लिखा -“जो तिल माही तेल है ज्यों चकमक में आग ,तेरा साहिब तुझ में जाग सके तो जाग “। ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से प्रभु की उस शक्ति का अनुभव अपने घट के भीतर किया जा सकता है। कथा में साध्वी बहनों द्वारा सुमधुर चौपाइयों और भजनों का गायन भी किया गया। कथा का समापन सीताराम कच्छवा,जितेन्द्र सोनी, रामलाल,मनु सेवग, जुगल उपाध्याय,देवशंकर जाजड़ा, किशन जाजड़ा,आशाराम द्वारा प्रभु की पावन मंगल आरती के साथ हुआ।
