

पंच परमेष्ठी में साधु पद वंदनीय
बीकानेर। चातुर्मासिक प्रवचन में साधु पद की महिमा बताते हुए गणिवर्य मेहुलप्रभ सागर म.सा. ने कहा कि पंच परमेष्ठी में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और (साधु-मुनि) पांच सर्वोच्च सम्मानीय पद है। साधु पद को णमोकार महामंत्र में भी वंदन किया गया है। उन्होंने कहा कि साधु-साध्वी सभी सांसारिक सुखों और मोह का त्याग कर पांच महाव्रतों सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य व ब्रह्मचर्य के साथ रात्रि भोजन सहित अनेक त्याग करते है, विपरीत परिस्थितियों में भी संयम की पालना करते हुए पद विहार करते है। उन्होंने कहा कि वे साधुता की मस्ती में मस्त, साधना, आराधना व देव, गुरु व धर्म की भक्ति करते हुए संघ व समाज को जिन शासन में जोड़ते है तथा समाज में व्याप्त मिथ्या धारणाओं, विचारों को दूर करते है। श्रावक-श्राविकाओं को सभी समुदाय व पंथ के मुनि व साध्वीवृंद का सम्मान करना चाहिए। उनकी निंदा या आलोचना नहीं करनी चाहिए। निंदा व आलोचना से पाप कर्म का बंधन होता है। रविवार को राकेश, शिव किशन वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष ही महावीर भवन में पांच द्रव्य एकासना, कलर थरैपी आदि विषयों पर विशेष व्याख्यान देंगे।
