

तपस्या का मुख्य उद्देश्य कर्म निर्जरा
बीकानेर। गंगाशहर में चल रहे आध्यात्मिक आयोजन के अंतर्गत मुनिकमल कुमार के सान्निध्य में मुनि नमिकुमार की तपस्याओं का अनुमोदन समारोह श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कमल कुमार जी ने मुनि नमिकुमार की अल्पावधि में की गई चार बड़ी तपस्याओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि “इतिहास में पढ़ते और पूर्वजों से सुनते थे कि ऐसे तपस्वी होते थे जो एक वर्ष में कई मासखामण कर लेते थे। आज हम यह दृश्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के काल में साक्षात देख रहे हैं।“ उन्होंने बताया कि मुनिश्री नमिकुमार जी ने मात्र सवा पांच महीने में क्रमशः 35, 22, 23 और 24 उपवास की चार कठिन तपस्याएं पूरी कर अपनी साधना, शक्ति और भक्ति का परिचय दिया है। मुनिश्री ने कहा कि “तपस्या का मुख्य उद्देश्य कर्म निर्जरा है, और निष्काम तप ही व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है।“
