

डॉ स्वामी की कविताओं में माटी की सुगंध
बीकानेर। शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के तत्वाधान में बहुआयामी कवि कथाकार डॉ. शंकरलाल स्वामी की हिंदी और राजस्थानी की तीन पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। स्वामी सदन में आयोजित लोकार्पण समारोह में में डॉ स्वामी के रचनाकर्म पर चर्चा के साथ नगर की संस्थाओं द्वारा अभिनन्दन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व्यंग्यकार संपादक डॉ अजय जोशी ने कहा कि डॉ स्वामी की हिंदी राजस्थानी कविताओं में माटी की सुगंध है। उन्होंने कहा कि डॉ स्वामी ने अपनी रचनाओं में मौलिक कथ्य, सहज भाषा, आम आवाम की आवाज को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ लेखक अशफ़ाक़ कादरी ने कहा कि डॉ स्वामी बहुआयामी रचनाकार है जिन्होने हिंदी राजस्थानी में गजल, कविता, दोहे, कहानी, लघुकथा, रेखाचित्र, यात्रा वृतांत, संस्मरण आदि विधाओं में सृजन किया है। लोकार्पित पुस्तक गजल गोठ पर डॉ. समीक्षा व्यास ने पत्रवाचन करते हुए कहा कि डॉ स्वामी की ग़ज़लें अध्यात्म और दर्शन की ओर ले जाती है जो आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा करने वाली हैं । उन्होंने कहा कि डॉ स्वामी की रचनाओं में जीवन के विविध विषय यथा प्रेम, भाईचारा, त्योहारों के रंग, स्त्री विमर्श, तिरंगा, संविधान, परदुःख, कातरता, भ्रष्टाचार विषयों पर लिखी गई है। लोकार्पित राजस्थानी पुस्तक “राज-काव्य“ के पत्रवाचन करते हुए डॉ.गौरीशंकर प्रजापत ने कहा कि डॉ. शंकरलाल स्वामी के राजस्थानी हाइकु : सामाजिक यथार्थ और मानवीय चेतना के पैरोकार है। उन्होंने कहा कि डॉ. स्वामी राजस्थानी साहित्य में आधुनिक संवेदनशीलता और जनजीवन के चितेरे हैं। कार्यक्रम समन्वयक राजाराम स्वर्णकार ने डॉ. शंकरलाल स्वामी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर पत्रवाचन किया । कार्यक्रम में शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान तथा बागेश्वरी संस्थान द्वारा कवि शंकरलाल स्वामी का अभिनन्दन किया गया। अभिनन्दन पत्र का वाचन मोहम्मद सलीम सोनू ने किया।
लोकार्पण समारोह में प्रेरणा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रेमनारायण व्यास, वरिष्ठ नागरिक समिति के अध्यक्ष डॉ. एस एन हर्ष, डॉ. बसन्ती हर्ष, बागेश्वरी संस्थान के अध्यक्ष अब्दुल शकूर सिसोदिया, कवि शिवशंकर शर्मा, कवि जुगलकिशोर पुरोहित, पत्रकार कौशलेश गोस्वामी, सुभाष विश्नोई, इसरार हसन क़ादरी, डॉ.मोहम्मद फारूक चौहान, गोविंद जोशी, राधा वैष्णव, दिनेश वैष्णव सहित नगर के गणमान्य उपस्थित थे।
