

रंगा ने ‘अंधारकाळ’ का बेजोड़ अनुवाद कर राजस्थानी पाठकों को सौगात दी
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान द्वारा कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की जयंती के अवसर पर तीन दिवसीय ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के तीसरे दिन लक्ष्मीनारायण रंगा की महत्वपूर्ण अनुवाद कृति का लोकार्पण, पौधारोपण एवं गायों को गुड़ चारा वितरण के साथ सम्पन्न हुआ। रंगा द्वारा राजस्थानी में अनूदित लोकार्पित कृति के मुख्य अतिथि देश के ख्यातनाम आलोचक-अनुवादक डॉ. मदन सैनी ने कहा कि रंगा ने मूल अंग्रेजी से शशि थरूर की कृति का राजस्थानी में ‘अंधारकाळ’ का बेजोड़ अनुवाद कर राजस्थानी पाठकों को सौगात दी है, क्योंकि आधुनिक युग में अनुवाद की महत्ता एवं उपादेयता को विश्वभर में स्वीकारा जा चुका है, इस प्रकार अनुवाद आज विश्व की आवश्यकता बन गया है। इस अवसर पर कीर्तिशेष रंगा की स्मृति में विभिन्न तरह के पौधों का रोपण किया गया। साथ ही इस अवसर पर गायों को हरा चारा एवं गुड़ आदि का वितरण नगर की कई गोशालाओं एवं सार्वजनिक स्थलों पर किया गया। कार्यक्रम में राजेश रंगा, हरिनारायण आचार्य, अशोक शर्मा, पुनीत कुमार रंगा, अंकित रंगा, तोलाराम सहारण, घनश्याम ओझा, अख्तर अली, अरूण व्यास आदि ने रंगा की स्मृति में पौधारोपण एवं गायों को गुड़-चारा वितरण कर कीर्तिशेष रंगा को अपनी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
