

स्वदेशी पशुधन संरक्षण पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन
बीकानेर। पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के कुक्कुट विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.), नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “सतत् कृषि एवं देशी पशुधन संरक्षणः सुरक्षित भविष्य का आधार“ का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. अजित सिंह यादव, सहायक निदेशक शिक्षा, गुणवŸाा एवं सुधार (ई.क्यू.ए. एण्ड आर.) आई.सी.ए.आर. ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान पशुओं की विभिन्न नस्लों के संरक्षण का प्रमुख केन्द्र है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के पशुधन संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सराहनीय कार्य कर रहा है। डॉ. ए.एस. यादव ने देशी पशुधन के महत्व को देखते हुए आई.सी.ए.आर. द्वारा इनके संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों की विवेचना की। डॉ. यादव में बताया कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन कार्यक्रम के तहत देश के पशुधन का डिजिटल रिकार्ड तैयार किये जाने की योजना है। डॉ. यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों हेतु उच्च शिक्षा में शैक्षणिक क्रेडिट बैंक का प्रावधान है जिसमें विद्यार्थियों की पूरी एकेडमिक प्रोग्रेस की जानकारी हासिल हो सकती है। मुख्य अतिथि डॉ. यादव ने वेटरनरी महाविद्यालय के चिकित्सा संकुल, पुस्तकालय एवं विभिन्न विभागों का अवलोकन भी किया एवं शैक्षणिक, शोध एवं प्रसार कार्यों की जानकारी हासिल की। वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने बताया कि राजस्थान कृषि एवं पशुधन आधारित प्रदेश है यहाँ भेड़, बकरी, भैस, ऊंट की विभिन्न देशी नस्लों का पशुपालकों द्वारा संरक्षण किया जा रहा हैं।
