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राजस्थान री अणमोल धरोहर संगोष्ठी आयोजित

राजस्थान री अणमोल धरोहर संगोष्ठी आयोजित
बीकानेर। राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किये जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा इन्टेक, बीकानेर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को रोटरी क्लब सभागार में ‘राजस्थान री अणमोल धरोहर‘ विषयक राजस्थानी संगोष्ठी आयोजित की गई। इन्टेक के कन्वीनर पृथ्वीराज रतनू ने कहा कि राजस्थान की असंख्य धरोहरें विश्वविख्यात हैं। हमें अपनी महान धरोहर पर गर्व करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी इनके महत्त्व के बारे में जागरूक करना चाहिए। डॉ. रीतेश व्यास ने विषय-प्रवर्तन करते हुए धरोहर के मूर्त, अमूर्त, प्राकृतिक प्रकारों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया और कहा कि धरोहर संरक्षण की दिशा में आमजन को भी प्रभावी भूमिका निभानी होगी। अकादमी सचिव शरद केवलिया ने राज्य की पुरातात्विक, स्थापत्य, सांस्कृतिक, धार्मिक, साहित्यिक, कला आदि क्षेत्रों की अमूल्य धरोहरों की जानकारी देते हुए कहा कि ये हमारे प्रदेश की पहचान, इतिहास, मूल्यों को दर्शाती हैं। डॉ. कृष्णलाल बिश्नोई ने अपनी राजस्थानी कविता ‘ख्यातां में सिरमौर‘ के माध्यम से राजस्थान की विभिन्न धरोहरों का महत्त्व बताया। डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने प्रदेश की कलात्मक व साहित्यिक धरोहरों के बारे में बताया। अमरसिंह खंगारोत ने राजस्थान के विविध पुस्तकालयों, अभिलेखागार व संग्रहालयों में उपलब्ध महत्त्वपूर्ण पुस्तकों व पांडुलिपियों की जानकारी दी। डॉ. नंदलाल वर्मा व प्रवीण गुप्ता ने धरोहर संरक्षण के संबंध में अनेक सुझाव प्रस्तुत किये। इस अवसर पर गोविंद जोशी, डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान, जुगलकिशोर पुरोहित, सुभाष बिश्नोई ने भी विचार रखे। कवि राजेन्द्र स्वर्णकार ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस अवसर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन किया गया। इस दौरान घनश्याम कल्याणी, महेन्द्र सिंह राठौड़, श्रीनिवास थानवी, कानसिंह, विमलचंद भोजक, रोहित कुमार स्वामी आदि उपस्थित थे।

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