

दयानन्द द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश अमूल्य ग्रंथ
बीकानेर। आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानन्द द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश वो अमूल्य ग्रंथ है जिसे पढ़ने से व्यक्ति स्वदेश प्रेम और स्वतंत्रता के लिए ज्वाला प्रज्वलित हो कर सर्वश्व न्यौछावर करने को तत्पर हो जाता है. तथा ये ज्ञान का भंडार है’ ये शब्द आर्य समाज महर्षि दयानन्द मार्ग के नूतन भवन के लोकार्पण करते हुए सत्य पाल सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कुलाधिपति, गुरुकुल कांगडी विश्व विद्यालय ने अपने उद्बोधन में कही। अर्जुन राम मेघवाल ने दिल्ली से ऑन लाइन संबोधन में कहा कि आर्य समाज का शिक्षा और महिला शिक्षा में खासतौर से पिछड़े और गरीब तबके के लिए अभूतपूर्व योगदान रहा है और बीकानेर क्षेत्र में इस आर्य समाज ने आज़ादी आंदोलन के समय जो प्रयास किए वे सराहनीय है। इस क्षेत्र में गणपति जैसे विद्वान एवं शास्त्र महारथी रहे हैं।
नगर विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि आर्य समाज का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है. प्रधान महेश आर्य ने बताया कि नगर आर्यसमाज का 112 वर्ष का इतिहास बताते हुवे कहा कि रामदेव पाठशाला के माध्यम से शिक्षा का 1947 तक प्रचार व प्रसार किया।
