Bikaner Rajasthan

आन्तरिक दुःख और पीड़ा को दूर करता है हनुमान चालीसा का पाठ

श्रीमती शशिबाला मित्तल की 28वीं पुण्यतिथि पर किया पाठ व हवन
बीकानेर। स्व. श्रीमती शशिबाला मित्तल धर्मपत्नी स्व. श्री त्रिलोकीनाथ मित्तल की 28वीं पुण्यतिथि पर उनकी पावन स्मृति में नखत बन्ना मन्दिर परिसर, बच्छासर में स्कूली विद्यार्थियों के साथ सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं हवन (अग्नि पाठ) का आयोजन किया गया तथा छात्रों को प्रसाद तथा स्टेशनरी वितरित की गई। इस अवसर पर श्री हनुमान जी के चरित्र और हनुमान चालीसा के महत्व के बारे में विद्यार्थियों के बताते हुए श्रीमती शशिबाला मित्तल स्मृति चेरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी विवेक मित्तल ने कहा कि वर्तमान में हमें जितनी भौतिक सुख-सुविधाओं की आवश्यकता है उससे ज्यादा जरूरी है स्वस्थ तन और स्वस्थ मन की। जैसे जब हमारे शरीर के किसी भाग पर चोट लगती है तो चोट को ठीक करने के लिए दवाई का सहारा लेते हैं ठीक उसी प्रकार आन्तरिक दुःख या पीड़ा को दूर करने के लिए नामजप या प्रभु का सहारा लेना चाहिए। श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना और हनुमानजी के नाता जोड़ना इसका सबसे सरल उपाय है। आज हम सभी को विशेषकर छात्रों और युवाओं को श्री हनुमानजी के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। श्री हनुमानजी ने संकट के समय श्रीरामचन्द्र जी के समस्त कार्य अपने बल और बुद्धि के उपयोग से निर्विघ्न पूरे किये उसी प्रकार छात्र भी जीवन में आने वाली कठिनाईयों का सामना सुझबुझ और धैर्य के साथ कर सकते हैं। श्री हनुमान चालीसा का नियमित पाठ व हवन हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। वरिष्ठ साधक रमेश जोशी ने कहा कि हनुमान चालीसा के प्रत्येक शब्द में मंत्रात्मक शक्ति है इसका पाठ करने से हमें बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति में सरलता होती है। राजीव मित्तल ने कहा कि श्री हनुमान हमें अपने प्रभु से निःस्वार्थ प्रेम और अनन्य भक्ति करना सीखाते हैं और प्रभु से जुड़ने का सबसे सरल उपाय है श्री हनुमान चालीसा का पाठ। इस अवसर पर पूजारी मदन सिंह, राजीवन मित्तल, रमेश जोशी, रणवीर सिंह, ओम सिंह, मनोहर सिंह, विरेन्द्र सिंह, मदन भोपजी, रामगिरि, भगवान गिरि, धीरजगिरि, सवाईगिरि आदि अनेक भक्तजन उपस्थित थे।

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