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रंगा का समृद्ध साहित्य मानवीय संवेदना का सच्चा दस्तावेज : तिवाड़ी

रंगा साहित्य के मौन ऋषि थे : विधायक व्यास
बीकानेर। साहित्यकार, चिंतक एवं शिक्षाविद् कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की दूसरी पुण्यतिथि पर आयोजित चार दिवसीय सृजन सौरम-हमारे बाऊजी समारोह के दूसरे दिन लक्ष्मीनारायण रंगा आत्मिक श्रृद्धासुमन-भावांजलि का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा स्व. रंगा प्रयोगधर्मी व सफल रचनाकार थे। उन्होने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण प्रसंगों को समकालीन संदर्भां में नई अर्थवत्ता प्रदान कर अपनी साहित्य विधाओं में उन्हें रचते हुए अपनी सृजनात्मक-संवेदनात्मक ऊर्जा से साहित्य और रंगमंच में महत्वपूर्ण अवदान दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानन्द व्यास ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा साहित्य के मौन ऋषि थे। उन्होने बीकानेर का गौरव अपनी बहुआयामी प्रतिभा के माध्यम से पूरे देश में ऊँंचा किया। उनका साहित्य, रंगकर्म एवं शिक्षा के प्रति सारा समर्पण पूर्ण रूप से सामाजिक सरोकारों को समर्पित रहा।
इस अवसर पर डॉ. भंवर भादाणी, बुलाकी शर्मा, डॉ. प्रेम नारायण व्यास, डॉ. कृष्णा आचार्य, अविनाश व्यास, गिरिराज पारीक, शुंभदयाल व्यास, शंकरलाल तिवाड़ी, भैरूरतन छंगाणी, गोपाल कुमार कुण्ठित, राजाराम स्वर्णकार, राजेन्द्र सुथार, घनश्याम साध, सौरभ बजाज, जितेन्द्र शर्मा, एडवोकेट द्वारकाप्रसाद पारीक, राजेश पुरोहित, दीपक पुरोहित, भंवर मोदी, चन्द्रशेखर आचार्य, कैलाश टॉक, इन्द्रा व्यास, डॉ. फारूख चौहान, विपल्व व्यास, हरिकिशन व्यास, आनंद छंगाणी, राहुल आचार्य, अरूण जे. व्यास, सुशील छंगाणी, भवानी सिंह, नवनीत व्यास, अशोक शर्मा, अंकित रंगा, सुनील व्यास, आत्माराम भाटी, गंगा बिशन बिश्नोई, जुगल किशोर पुरोहित, डॉ. नृसिंह बिन्नाणी, कासिम बीकानेरी, जाकिर अदीब, इसहाक हसन गौरी, अख्तर अली, कालूराम सुथार, कन्हैयालाल पंवार, किशन कच्छावा, सुषमा रंगा, विभा रंगा, अर्चना शर्मा सुशील रंगा, बिन्दु प्रकाश रंगा, शशि शेखर रंगा, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा ने अपनी गरिमामय साक्षी देते हुए स्व. रंगा को पुष्पांजलि अर्पित की। राजेश रंगा ने चार दिवसीय समारोह की मूल भावना साझा करते हुए कहा कि किसी साहित्यकार की स्मृति में रक्तदान जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन होना अपने आप में एक पुनीत उपक्रम है।

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