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पुष्करणा सावा: बारातों से सजा बीकानेर, पूरा शहर बना बाराती

पुष्करणा सावे पर परम्परा, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम
बीकानेर। पुष्करणा सावे के पावन अवसर पर जब विष्णु स्वरूप दूल्हे पारम्परिक वेशभूषा में विवाह के लिए निकले, तो बीकानेर की गलियों से लेकर चौक-चौराहों तक उत्सव का सैलाब उमड़ पड़ा। सिर पर केसरिया खिड़किया पाग, ललाट पर पगड़ीइ पीतांबर व बनियान धारण किए, हाथों में चांदी की छड़ी (गेड़िया) और लौंकार के नीचे चलते इन दूल्हों ने पूरे शहर को बाराती बना दिया। बारात के साथ साथ तू मत डरपे हो लाडला, केेसरियो लाडला और केसरियो लाडो जीवतों रे जैसे पारम्परिक गीतों की गूंज सुनाई दी। सड़कों के दोनों ओर खड़े शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विष्णुरूपी दुल्हों और बारातियों का आत्मीय स्वागत किया। दुल्हों को देखने और स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग बारह गुवाड़, मोहता चौक, साले की होली, सदाफते, तेलीवाड़ा, हर्षों का चौक, रत्ताणी व्यासों का चौक, चौथाणी ओझा चौक, कीकाणी व्यास चौक, आचार्य चौक, नत्थूसर गेट, गोकुल सर्किल सहित अनेक स्थानों पर मौजूद रहे। कई चौक-चौराहों पर दुल्हों का पारम्परिक सम्मान भी किया गया। विवाह से पूर्व खिरोड़ा भरने की रस्म में वधू पक्ष द्वारा वर पक्ष के यहां सूखी खाद्य सामग्री, बर्तन, वस्त्र और दूध भेजा गया। वर पक्ष के आंगन में सार्वजनिक रूप से गोत्राचार हुआ, जिसमें दोनों पक्षों के पंडितों ने गोत्र व पूर्वजों का वाचन किया। इसके बाद कन्यादान का संकल्प लिया गया। पुष्करणा समाज की परम्परा के अनुसार विष्णु वेश में आए दुल्हों का विभिन्न सामाजिक व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सम्मान किया गया। कर्मवान फाउंडेशन की ओर से 11 विष्णुरूपी दुल्हों को सम्मानित किया गया, जिसमें घनश्याम पुरोहित को मोटरसाइकिल, अन्य को एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर और जूसर प्रदान किए गए। बारह गुवाड़ चौक में सावित्री देवी कल्ला चौरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रथम दूल्हे को ₹51,000, द्वितीय को ₹31,000 और तृतीय को ₹21,000 की नकद राशि भेंट की गई। सावे के मद्देनजर पुलिस और यातायात विभाग पूरी तरह सतर्क रहा। शहर के प्रमुख स्थानों पर पुलिस जाप्ता तैनात रहा। वहीं स्थानीय लोगों ने भी यातायात व्यवस्था संभालने में पुलिस का सहयोग किया। विष्णुरूपी दुल्हों को सम्मानित करने की परम्परा के चलते कई स्थानों पर लोगों को पहले दूल्हे के आगमन के लिए लगभग तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जो अपने आप में एक अलग अनुभव रहा।

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