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पुष्करणा सावा महिला सम्मेलन आयोजित

पुष्करणा सावा महिला सम्मेलन आयोजित
बीकानेर। पुष्करणा सावा की परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने, उसके सांस्कृतिक महत्व को समझाने तथा समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ने के उद्देश्य से रमक झमक परिसर में पुष्करणा सावा महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि सावा के आयोजन में सभी समाजों की सहभागिता सुनिश्चित कर तथा इसका सशक्त प्रचार-प्रसार कर पुष्करणा सावा को विश्व पटल पर पहचान दिलाई गई है, जिससे बीकानेर शहर और सावा संस्कृति का गौरव बढ़ा है। इसका श्रेय रमक झमक संस्था को जाता है। सम्मेलन की मुख्य वक्ता सेवा-निवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. सुदेश शर्मा ने कहा कि रमक झमक ने सावा के आयोजन में हर जाति और समाज को साथ लेकर एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी कारण यह सावा हर व्यक्ति को अपना सा लगता है। उन्होंने कहा कि सावा की मूल भावना और परंपरा को समझाकर प्रस्तुत करना ही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।
रूपम आचार्य ने कहा कि रस्मों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि महिलाएं ही मूल परंपराओं को जीवित रखकर संस्कृति का संरक्षण कर सकती हैं। बबीता सेवग ने कहा कि महिलाओं की जिम्मेदारी अधिक है और अधिक से अधिक महिलाओं को इसमें योगदान के लिए जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। सम्मेलन में श्रीमती लक्ष्मी ओझा, सुनीता शर्मा, इंदु वर्मा, पुष्पा शर्मा, बबीता शर्मा, रामप्यारी चुरा, भवरी छंगाणी एवं प्रो. रजनी हर्ष सहित अनेक महिलाओं ने अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में वयोवृद्ध श्रीमती रामकवरी ओझा ने सभी से सावा में ही विवाह करने की अपील की तथा आगंतुकों को सावा की कुछ प्रमुख रस्म-रिवाजों की जानकारी दी। सावा सम्मेलन में रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरूं’ ने कहा कि सावा की हर रस्म वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से इस परंपरा को संरक्षित रखने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की अपील की।

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