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म्हारी गणगौर उत्सव: दूसरे दिन परम्परा और आधुनिकता पर हुई सार्थक चर्चा

म्हारी गणगौर उत्सव: दूसरे दिन परम्परा और आधुनिकता पर हुई सार्थक चर्चा
बीकानेर। गणगौर के अवसर पर रमक झमक में आयोजित “म्हारी गणगौर उत्सव” के दूसरे दिन आधुनिक युग में गणगौर की महत्ता विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें युवतियों ने अपने विचार व्यक्त किए, वहीं बुजुर्ग महिलाओं ने अपने अनुभव और संस्मरण साझा कर कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में कई महिलाओं ने गणगौर पर आधारित रचनाएं भी प्रस्तुत कीं। प्रहलाद ओझा ने बताया कि इस उत्सव में गीत और नृत्य की विशेष प्रधानता होती है, लेकिन वर्तमान समय में पारंपरिक गणगौर गीतों और उनकी राग-धुनों का प्रचलन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि बीकानेर और कोलकाता में आज भी पुरुष गीत मंडलियां इन पारंपरिक गीतों को जीवित रखे हुए हैं। किरण सोनी एवं राजकुमारी व्यास ने कहा कि हमें अपनी परम्परा और संस्कृति से जुड़े ऐसे आयोजनों को परिवार की नई पीढ़ी, विशेषकर बहू-बेटियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए। वहीं डॉ. सुरेखा व्यास, चंद्रकला सोनी और बबीता शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक युग के साथ चलते हुए भी हमें अपनी मूल संस्कृति और परम्पराओं से दूर नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर विनीता शर्मा, गायत्री देरासरी और प्रीति ओझा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पिंकी जैन, विशिष्ट अतिथि आरती आचार्य तथा अध्यक्षता राम कंवरी ओझा ने की।

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