

गाजे-बाजे से हुआ नगर प्रवेश
बीकानेर। जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के जैनाचार्य, श्रुत भास्कर, गच्छाधिपति आचार्यश्री धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी महाराज अपने सहवृति मुनियों, तथा उनकी सांसारिक माताजी साध्वीश्री अमित गुणाजी (माताजी महाराज) ने सहवृति साध्विंयों के साथ मंगलवार को गाजे बाजे से नगर प्रवेश किया।
गोगागेट के बाहर वल्लभ चौक के पास स्थित गौड़ी पार्श्वनाथ से रवाना हुआ नगर प्रवेश का जुलूस विभिन्न मार्गो, जैन बहुल्य मोहल्लों से होते हुए रांगड़ी चौक की पौषधशाला पहुंच कर धर्मसभा में बदल गया। धर्म सभा में जैनाचार्य धर्मधुरंधरजी ने कहा कि राम भक्त हनुमान की तरह देव, गुरु व धर्म के प्रति समर्पण रखे।
कार्यक्रम में कोचर मंडल, सौम्य मंडल, आराधना मंडल, ओस्तरा मंडल, वीर मंडल ने भक्ति व स्वागत गीत प्रस्तुत किए। साध्वी पीयूष पूर्णाश्रीजी ने गुरु स्तुति की। श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के मंत्री विजय कोचर ने जैनाचार्य, मुनिवृंद व साध्वीवृंद का स्वागत किया तथा विहार के दौरान हुई किसी तरह की असातना पर क्षमा याचना की।
श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के अध्यक्ष रिखब चंद सिरोहिया ने बताया कि जैनाचार्य विजय धर्मधुरन्धर सूरिश्वरजी एवं साध्वी अमितगुणाजी (माताजी महाराज) आदिठाणा के नगर प्रवेश के जुलूस में नागौर व पंजाब की ढोल तासा पार्टी ने अनेक करतब दिखाते हुए श्रावक-श्राविकाओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। बैंड पार्टी नवकार महामंत्र का धुन बजा रही थी।
गच्छाधिपति विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी, विजय धर्मधुरंधरजी व जैनाचार्य जयानंदजी महाराज की सांसारिक माताजी 95 वर्षीय साध्वीश्री अमित गुणाजी महाराज सहवृति साध्वी पीयूष पूर्णा, प्रशांत पूर्णा नयन पूर्णा, नमन पूर्णा व अनंत पूर्णाश्रीजी के साथ करीब तीन‘-चार दशक के बाद अम्बाला से 2 मार्च को विहार कर बीकानेर पहुंची है। नगर प्रवेश पर साध्वीश्री अमितगुणाजी (माताजी) महाराज ने कहा कि बीकानेर के श्रावक-श्राविकाओं में देव, गुरु व धर्म के प्रति समर्पण व श्रद्धा की कोई सानी नहीं है । उन्होंने कहा कि बीकानेर प्राचीन जैन मंदिरों, धर्मनिष्ठ श्रावक-श्राविकाओं के कारण की पुण्यधर्म धरा के रूप् में पहचान रखती है। श्रावक-श्राविकाएं अपनी पहचान को कायम रखें तथा नियमित धर्म ध्यान से जुड़े रहे।
