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भक्ति गुणों से परिपूर्ण साध्वी थी कीर्तियशा

भक्ति गुणों से परिपूर्ण साध्वी थी कीर्तियशा
बीकानेर। युगप्रधान आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमलकुमार के सान्निध्य में संथारा साधिका साध्वी कीर्तियशा जी की गुणानुवाद सभा आयोजित हुई। इस अवसर पर बोलते हुए उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमलकुमार जी स्वामी ने कहा कि साध्वी श्री कीर्तियशा जी विनम्रता, सहजता, सरलता, सहिष्णुता, ओर गुरू भक्ति आदि गुणों से परिपूर्ण साध्वी थी। इस अवसर पर शासन श्री साध्वी श्री बसंतप्रभा जी ने कहा कि साध्वी कीर्तियशा जी में तीन विषेशताऐं मुख्य रूप से थी। समता, व्यवहारकुशलता और श्रमशीलता। इन विषेशताओ को हम सभी ने प्रत्यक्ष देखा है। साध्वी श्री कीर्तियशा जी के संथारा संलेखना के लक्ष्य को साध्वी मल्लिकाश्री जी ने पूर्ण जागरूकता से सम्पूर्ण करवाया। लूणकरण छाजेड़ नेकहा कि तेरापंथ धर्म संघ में जो सेवा होती है उससे अच्छी गृहस्थ जीवन में भी नहीं हो सकती। समता भाव से कीर्ति यशा जी ने असाध्य रोग से मुकाबला किया और साध्वी मल्लिका श्री ने प्रतिछाया बनकर सेवा की वह अद्भुत रही।

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