

मैं और मेरापन का त्याग करें
बीकानेर। रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में बुधवार को गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने प्रवचन में कहा कि मैं और मेरा पन के भाव का त्याग करें । आत्मा व परमात्मा के अलावा संसार में कोई भी सांसारिक वस्तु, शरीर भी अपना नहीं है। आयुष्य पूर्ण होने पर शरीर भी एक दिन पंच महाभूतों में विलीन कर दिया जाता है। जीवन की सार्थकता आत्मा व परमात्म तत्व को पहचान कर अपने को परमात्मा का तथा परमात्मा को अपना मानने में है। परमात्मा का स्मरण करने, परमात्मा के शासन के आज्ञा के अनुसार चलने, देव, गुरु व धर्म के प्रति श्रद्धा रखने में है।
