

बीकानेर। श्रीडूंगरगढ़ की कमलादेवी, धर्मपत्नी स्वर्गीय चम्पालाल डागा का 20 फरवरी को स्वर्गवास हो गया। जीवन की अंतिम घड़ियों में उन्होंने नेत्रदान कर मानव सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे वे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गईं। परिजनों की सहमति से संपन्न हुआ यह नेत्रदान किसी दृष्टिहीन के जीवन में नई रोशनी, नई दृष्टि एवं नई आशा का संचार करेगा। यह पुण्य कार्य जैन धर्म की अहिंसा, करुणा एवं परोपकार की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है। उल्लेखनीय है कि स्वर्गवास के उपरांत उनके देवर एवं पुत्रियों सहित समस्त परिवारजनों ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की, जो उनके दृढ़ संकल्प एवं आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है। नेत्रदान हेतु सहमति प्रदान करने वाले परिवारजनों में कैलाशचन्द डागा , पुत्रियाँ सरिता संचेती, हेमलता बुच्चा, सुनीता भंसाली, कांता बुच्चा, संगीता एवं अन्य परिवारजन प्रमुख रहे। इस अवसर पर परिषद संयोजक अशोक झाबक के नेतृत्व में नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। नेत्र संग्रह का कार्य प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की टीम द्वारा भंवरलाल प्रजापत एवं दिनेश शर्मा ने किया।
