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डॉ. टेस्सीटोरी का राजस्थानी भाषा-संस्कृति के संरक्षण में अभूतपूर्व योगदान

डॉ. तैस्सितोरी का राजस्थानी भाषा-संस्कृति के संरक्षण में अभूतपूर्व योगदान
बीकानेर। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से राजस्थानी भाषा-संस्कृति के महान् साधक डॉ. एल. पी. तैस्सितोरी की पुण्यतिथि पर उनके समाधि-स्थल पर शनिवार को पुष्पांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर अकादमी सचिव शरद केवलिया ने कहा कि पुरातत्ववेत्ता-बहुभाषाविद् डॉ. तैस्सितोरी ने राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति के संरक्षण-संवर्द्धन के लिये अविस्मरणीय योगदान दिया। उन्होंने इटली से बीकानेर आकर इस क्षेत्र का ऐतिहासिक सर्वेक्षण किया व अमूल्य प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों, शिलालेखों, सिक्कों, प्रतिमाओं आदि की खोज की। केवलिया ने बताया कि राजस्थानी भाषा अकादमी द्वारा चालीस से भी अधिक वर्षों से डॉ. तैस्सीतोरी की‌ पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष पुष्पांजलि अर्पित की जा रही है।
इस दौरान अंजलि टाक, केशव जोशी, कानसिंह, मनोज मोदी, रोहित कुमार स्वामी उपस्थित थे।

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