

डॉ. जोशी के निबंध उनके निजी चिंतन एवं सहज अनुभूति है
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा पुस्तकालोचन की तीसरी कड़ी कि तहत डॉ. अजय जोशी के नवीन राजस्थानी निबंध संग्रह ‘‘न्यारा निरवाळा निबंध’’ पर आयोजित हुई।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार-आलोचक कमल रंगा ने कहा कि डॉ. अजय जोशी के निबंध उनके निजी चिंतन एवं अनुभूति की सहज अभिव्यक्ति है। रंगा ने आगे कहा कि निबंध में सीमित, क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित होना चाहिए तभी वह प्रभावी होगा। निबंध के बारे में बताते हुए रंगा ने कहा कि निबंध शब्द फ्रांसीसी है, जिसे पहली बार 16वीं शताब्दी में मान्तने ने साहित्य की विधा के रूप में स्थापित किया। यह संक्षिप्त गद्य रचना का रूप है, जो किसी एक विषय पर विचार और राय प्रस्तुत करता है। यह कथा, साहित्य, पत्रकारिता और वैज्ञानिक साहित्य के निकट है।
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आलोचक एवं शिक्षाविद् डॉ. उमाकान्त ने कहा कि डॉ. जोशी के निबंध सारगर्भित एवं जीवनोपयोगी है। डॉ. गुप्त ने आगे कहा कि निबंध की समृद्ध परंपरा रही है, निबंध में साहित्य की सभी विधाओं के कुछ महत्वपूर्ण तत्वों का समावेश रहता है। निबंध गद्य साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली एवं अभिव्यंजना की दृष्टि से कठिन है।
कार्यक्रम में साहित्यकार बुलाकी शर्मा, राजाराम स्वर्णकार, गिरिराज पारीक, अशोक रंगा, डॉ. नृसिंह बिन्नाणी, चित्रकार योगेन्द्र पुरोहित, कवि शिव दाधीच, प्रेम नारायण व्यास, बी. एल नवीन, शिवशंकर शर्मा, शक्कूर बीकाणवी, गंगाबिशन बिश्नोई, भवानी सिंह, अशोक शर्मा, तोलाराम सारण,घनश्याम ओझा, कार्तिक मोदी सहित गणमान्यों की सहभागिता रही।
