

प्रयोगशाला सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर हुआ मंथन
बीकानेर। उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रयोगशाला सुरक्षा एवं संरक्षा विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन तीन सत्रों में विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों और विशेषज्ञों ने सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा करते हुए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
पहले सत्र में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन और शैक्षणिक फिल्मों के माध्यम से प्रयोगशाला सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया। इस दौरान भोजन, दवाओं, प्लास्टिक और एंटीबायोटिक्स से जुड़े विषयों पर प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए। सत्र की अध्यक्षता डॉ. उमा राठौर एवं डॉ. मुक्ता ओझा ने की। दूसरे सत्र में चंचल शर्मा, दुर्गेश खत्री और लक्ष्य अरोरा ने अलग-अलग विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। चंचल शर्मा ने क्यूआर कोड के माध्यम से सुरक्षा मापदंडों को सरल तरीके से समझाया तथा छात्रों को नैतिक एवं जागरूकता आधारित सुरक्षा कार्यक्रम से जोड़ने का प्रयास किया। लक्ष्य अरोरा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सत्र की शुरुआत में ही सुरक्षा नियमों एवं नैतिकता की जानकारी दी जानी चाहिए और परिसर के साथ समाज में भी नैतिक जागरूकता प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. मुक्ता ओझा ने करते हुए सुझाव दिया कि छात्र स्वयं प्रयोगशाला सुरक्षा की योजना बनाएं। इसके तहत प्रयोगशालाओं में चार प्रकार के कचरा डिब्बे स्थापित किए जाएंगे तथा प्रत्येक रसायन के लिए सामग्री सुरक्षा डेटा शीट तैयार कर प्रदर्शित की जाएगी। समापन सत्र में प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. आर. के. पुरोहित ने अध्यक्षता की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में रसायन विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एच. के. पांडे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. सुरुचि गुप्ता, डॉ. एस. के. वर्मा सहित कई विद्यार्थी—वर्षा सिंह, एकता तंवर, नूतन पंवार, केशव खत्री, प्रिक्षा देलू आदि मौजूद रहे। समापन सत्र का संचालन डॉ. एच. एस. भंडारी ने किया।
