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शिव पुराण कथा की पूर्णाहुति

शिव पुराण कथा की पूर्णाहुति
12 ज्योर्तिलिंगों की कथा का वर्णन
बीकानेर। श्रीराम कथा समिति के तत्वाधान में सीताराम भवन में चल रही 9 दिवसीय शिव पुराण कथा की मंगलवार को पूर्णाहुति हुई। इस मौके पर कथा के अंतिम दिन वृन्दावन से पधारे महाराज भरत शरण ने कहा कि कि ज्ञान, धर्म, भक्ति का मूल है। पांच दान यश, मान, कीर्ति, नम्रता, सरल सत्य स्वयं परमात्मा है। कलयुग, कलयुग नहीं है बल्कि करयुग है। अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी। जो तन देखता है,शरीर देखता है वह सक्षम नहीं है। सक्षम वहीं है जो मन को देखता है, भाव को देखता है। संसार में सब कुछ सपना है, नींद में जो देखा वो भी सपना है। यह सब असत्य है, सत्य स्वयं राम है। परहित करो,सभी को जाग्रत करो,सम्मान करो,भजन करो,हॅंसते रहो,मस्त रहो,मुस्कराते रहो। भगवान कभी भेद नहीं करता। जीव मात्र एक ऐसा प्राणी है जो भेद करता है। इस मौके पर उन्होंने 12 ज्योर्तिलिंगों की कथा का संक्षिप्त में वर्णन किया। इससे पहले नारायण डागा व शीला डागा,प्रेम रतन चांडक ने परिवार सहित पूजा अर्चना करवाई। क था के साथ-साथ प्रसंग के अनुसार वृंदावन से पधारे प्रमुख संगीतकार सोनू, विष्णु तथा बंटी महाराज ने शानदार भजनों की प्रस्तुति से पूरे पंडाल को सदैव भक्ति युक्त बनाने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया।
महाराज श्री का किया गया सम्मान
कथा के समापन अवसर पर आयोजन समिति के नारायण डागा,घनश्याम कल्याणी,क न्हैयालाल सारड़ा,जगदीश कोठारी,नारायण मिमानी,याज्ञवल्क्य दमानी,मोहित चांडक ,विष्णु चांडक,नारायण दम्माणी,पवन कुमार राठी,सुशील करनानी,लक्ष्मी नारायण बिहानी,शिवनारायण राठी,संदीप सारड़ा,सौरभ राजा चांडक,संजय मूंदड़ा आदि ने महाराज श्री को शॉल,श्रीफल व अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं पवन राठी ने व्यक्ति गत रूप से महाराज श्री को सम्मान पत्र भेंट किया।

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