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बालकों को राजस्थानी बोलने-लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाए

बालकों को राजस्थानी बोलने-लिखने के लिये प्रोत्साहित किया जाए

बीकानेर। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा संत सांईनाथ पब्लिक स्कूल, श्रीरामसर रोड के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में बालकों को राजस्थानी भाषा बोलने-लिखने के लिये प्रेरित-प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर अकादमी सचिव शरद केवलिया ने कहा कि किसी भी प्रदेश की भाषा उस प्रदेश की संस्कृति, साहित्य, गौरव की विशिष्ट पहचान होती है। राजस्थानी भाषा करोड़ों राजस्थानियों की मायड़ भाषा है। नन्हे बालकों को राजस्थानी बोलना व लिखना सिखाने के शुभ कार्य में अभिभावक-शिक्षक उनकी हरसंभव मदद करें। बेसिक पी.जी. महाविद्यालय के राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्राथमिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होना चाहिये, प्रदेश के विद्यालयों में राजस्थानी में प्राथमिक शिक्षा देने से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी अत्यधिक लाभान्वित होंगे। उन्होंने आशा व्यक्त करी कि राजस्थानी को शीघ्र ही संवैधानिक मान्यता मिलेगी। अकादमी के सूचना सहायक केशव जोशी ने कहा कि हमें अपने घरों में राजस्थानी में ही वार्तालाप करना चाहिए, जिससे बच्चे सुगमता से राजस्थानी लिख व बोल सकें। इस दौरान बच्चों से हिन्दी वाक्यों का राजस्थानी में अनुवाद करवाया गया व राजस्थानी शब्दों के अर्थ पूछे गये। इस अवसर पर भवानीशंकर आचार्य, सुनीता आचार्य, भारती सुथार, प्रहलाद पुरोहित, उर्मिला सुथार, अंजू सुथार, भास्कर आचार्य, भावना आचार्य सहित शाला के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित थे।

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