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मांड लोक गीतों की विरासत के संरक्षण का आह्वान

मांड लोक गीतों की विरासत के संरक्षण का आह्वान
बीकानेर। मांड कोकिला पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की 33वी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जयनारायण व्यास कॉलोनी में “राजस्थान के मांड लोकगीतों पर चर्चा का आयोजन किया गया। चर्चा में वक्ताओं ने स्व अल्लाह जिलाई बाई की विरासत और स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने और मांड गीतों के समुचित संरक्षण का आव्हान किया। डॉ. अजीज अहमद सुलेमानी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन कार्यक्रम में पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई को खिराजे अकीदत पेश की गई। इस अवसर पर आयोजित राजस्थान के मांड लोकगीतों के संरक्षण विषयक चर्चा में कवि कथाकार संस्कृतिकर्मी राजेंद्र जोशी ने कहा कि अल्लाह जिलाई बाई और मांड गायिकी एक दूसरे के पर्याय है। उन्होंने कहा कि जिलाई बाई के लोकप्रिय गीत “केसरिया बालम“ को बीकानेर में आयोजित होने वाले पर्वों, पर्यटन कार्यक्रमों, समारोहों में निरंतर प्रसारित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में गीतकार कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने स्व अल्लाह जिलाई बाई के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वे लोक संगीत के प्रति समर्पित कलाकार थी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अशफाक कादरी ने अल्लाह जिलाई बाई के लोकगीत“ पर पत्रवाचन किया ।

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