

राजस्थान स्थापना दिवस समारोह
बीकानेर। राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में ’शौर्य, स्वाभिमान और संस्कारों की धरती राजस्थान’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित संभागियों को अपने व्याख्यान से जोड़ते हुए डॉ. चक्रवर्ती श्रीमाली ने वेद परम्परा, लुप्त नदी सरस्वती का स्मरण करते हुए राजस्थान की धरा पर अवतरित पन्नाधाय, मीरा, महाराणा प्रताप व बीकानेर के शासक कर्णसिंह को राजस्थान विकास के विभिन्न उपक्रमों में याद किया। मुख्य अतिथि शिक्षाविद् मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. गौरव बिस्सा ने वीर प्रसूता धरा राजस्थान की गौरवमयी परम्परा को तथ्यों और तर्कों के साथ प्रस्तुत किया। बिस्सा ने कहा तेरह वर्षीय बालिका काली बाई, मां अमृता व सहल कंवर का बलिदान विश्व में एकमात्र उदाहरण में गिना जाता है। ठीक इसी प्रकार गोविन्द गिरी के नेतृत्व में आयोजित सम्प सभा के दौरान हुए बलिदान कोई सानी नहीं। अपने उद्बोधन में डॉ. बिस्सा नेविचार, विश्वास व विवेक की त्रिवेणी राजस्थान को अनेक ऐतिहासिक प्रसंगों के माध्यम से व्याख्यायित किया। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् पुष्पा शर्मा ने वीर दुर्गादास, रानी पद्मिनी का उदाहरण देते हुए लोक कला व संस्कृति पर अपने विचार रखे। संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने राजस्थान के लोक व परम्परा की समृद्धि के साथ ऐतिहासिक व मिथकीय साहित्य के सन्दर्भों को प्रस्तुत किया।समारोह में डॉ. मदन सैनी, सत्यनारायण योगी, भंवर भोजक, सत्यदीप, श्रीभगवान सैनी, अनिल सोनी, रामचन्द्र राठी, राजेश सारस्वत, सुनील खांडल, नारायण शर्मा, विजय महर्षि, मुकेश सैनी, बालकिशन, राजीव श्रीवास्तव, बजरंग शर्मा, शुभकरण पारीक, सत्यनारायण स्वामी, रमाकांत झंवर, डॉ. मनीष सैनी, राजू शर्मा, महावीर सारस्वत सहित अनेक विद्वानों, और साहित्यकारों के साथ आम जन ने सहभागिता निभाई।
