

विश्व कविता दिवस पर त्रिभाषा काव्य गोष्ठी का आयोजन, कविता के विविध रंगों की बिखरी छटा
बीकानेर। बीकानेर में प्रज्ञालय संस्थान द्वारा विश्व कविता दिवस के अवसर पर एक विशेष काव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार कमल रंगा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कमल रंगा ने कहा कि कविता का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही पुराना है, जो प्रारंभिक दौर में मौखिक परंपराओं, गीतों और मंत्रों के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने कविता के उद्भव और उसकी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए अपनी रचना “बगत बेबगत/आपरै ही मतै/आयन ढूकी…” प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने विश्व कविता दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कविता समय के साथ नए-नए रंगों में सामने आई है। उन्होंने इसे बीकानेर की समृद्ध काव्य परंपरा में एक अनूठा साहित्यिक नवाचार बताया। इस दौरान उन्होंने अपनी ताजा ग़ज़ल “कोई हमें बताए/जिनको डराती है…” प्रस्तुत कर उर्दू शायरी की मिठास से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस त्रिभाषा काव्य गोष्ठी में हिन्दी, उर्दू एवं राजस्थानी भाषाओं के कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को समृद्ध किया। इस अवसर पर कवयित्री इन्द्रा व्यास, डॉ. कृष्णा आचार्य, जुगल किशोर पुरोहित, डॉ. गौरी शंकर प्रजापत, विप्लव व्यास, हनुमंत गौड़, लीलाधर सोनी सहित अन्य रचनाकारों ने भी अपनी काव्य प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में मदन जैरी, पुनीत कुमार रंगा, राहुल आचार्य, भवानी सिंह, अशोक शर्मा, तोलाराम सारण, अख्तर अली, घनश्याम ओझा, नवनीत व्यास, कार्तिक मोदी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
