

12 साल की उम्र में शादी, कोर्ट ने बाल विवाह किया निरस्त
बीकानेर/जोधपुर। महज 12 वर्ष की उम्र में बाल विवाह की बेड़ियों में बंधी खुशबू को 9 साल तक सामाजिक और मानसिक पीड़ा सहने के बाद आखिरकार न्याय मिल गया। अब 21 वर्ष की आयु में नवसंवत्सर के अवसर पर उसे इस बंधन से मुक्ति मिल गई है। सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति भारती के प्रयासों से खुशबू ने अपने बाल विवाह को निरस्त कराने के लिए जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 में वाद दायर किया था। मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश वरुण तलवार ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए बाल विवाह को निरस्त कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद खुशबू और उसके परिवार में राहत और खुशी का माहौल देखने को मिला। सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। यह निर्णय न केवल खुशबू के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश है। अपने आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह बच्चों के वर्तमान और भविष्य दोनों को अंधकारमय बना देता है, इसलिए इस कुप्रथा को समाप्त करना अत्यंत आवश्यक है। यह फैसला बाल विवाह के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
