

ढाई आखर प्रेम के विषय पर पांच दिवसीय सत्संग का समापन
बीकानेर। संत स्वामी विमर्शानंदजी महाराज के सान्निध्य में ढाई आखर प्रेम के विषय पर आयोजित पांच दिवसीय सत्संग का समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सत्संग का लाभ लिया। सत्संग के दौरान प्रेम तत्व पर व्याख्यान देते हुए स्वामी विमर्शानंदगिरि महाराज ने कहा कि प्रेम ही हमारी आत्मा का मूल स्वरूप है और प्रेम का विस्तार करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रेम जितना स्वार्थ और अहंकार से मुक्त होगा, उतना ही अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनेगा। इसी कारण प्रेम का आधार त्याग, सेवा, समर्पण और श्रद्धा को माना गया है। महाराज ने कहा कि आज समाज में प्रेम की धारा कहीं-कहीं क्षीण होती दिखाई दे रही है। चाहे वह व्यक्तिगत प्रेम हो, पारिवारिक प्रेम हो, सामाजिक प्रेम हो, संस्थागत प्रेम हो, राष्ट्रीय प्रेम हो या ईश्वर के प्रति प्रेमकृहर स्तर पर प्रेम की भावना कमजोर पड़ती नजर आती है। ऐसे समय में प्रेम, करुणा और आपसी सद्भाव को बढ़ाने की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में स्वार्थ और अहंकार को त्याग कर सेवा और समर्पण की भावना को अपनाए, तो समाज में प्रेम और सौहार्द की धारा स्वतः प्रवाहित होने लगेगी। प्रेम ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को व्यक्ति से, समाज को समाज से और मनुष्य को ईश्वर से जोड़ती है।
सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ प्रवचनों को सुना और समाज में प्रेम, शांति तथा सद्भाव का संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया और सत्संग के सफल आयोजन के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
