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संरक्षित होंगी सैंकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियां

संरक्षित होंगी सैंकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियां
बीकानेर। शार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की सैंकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए डिजिटाइजेशन का कार्य सोमवार को शुरू हुआ। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम् मिशन के जनवरी में जयपुर के विश्व गुरुदीप आश्रम शोध संस्था और इंस्टीट्यूट के मध्य इन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए एमओयू हुआ था। इसके तहत संस्था के तकनीकी प्रतिनिधियों ने पांडुलिपियों के संरक्षण कार्य प्रारम्भ किया। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मंदन सैनी, जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य, गीतकार राजाराम स्वर्णकार तथा पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इंस्टीट्यूट के सचिव राजेन्द्र जोशी ने बताया कि 27 जनवरी को सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा कलस्टर केंद्र विश्वगुरूदीप आश्रम शोध संस्थान, जयपुर के मध्यम एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अनुसार इंस्टीट्यूट की अनमोल हस्तलिखित पांडुलिपियां डिजिटल रूप में सुरक्षित होंगी, जो राजस्थानी साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को नई दिशा प्रदान करेगा। संस्था संयोजक राजाराम स्वर्णकार ने बताया कि विश्व गुरूदीप आश्रम शोध संस्थान द्वारा इन पांडुलिपियों का निःशुल्क डिजिटलीकरण किया जाएगा। डिजिटाइजेशन का यह कार्य संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञों आश्रम के मोहित बिस्सा और लव कुमार देराश्री द्वारा इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों की देखरेख में होगा। उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट की 250 से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाएगा। पुस्तकायाध्यक्ष विमल शर्मा ने आगंतुकों का आभार जताया।

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