

राजस्थानी भाषा मान्यता की मांग को लेकर राज्य स्तरीय उपवास
बीकानेर। राजस्थानी युवा लेखक संघ एवं प्रज्ञालय संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने तथा प्रदेश की दूसरी राजभाषा घोषित करने की मांग को लेकर राज्य स्तरीय एक दिवसीय उपवास आयोजित किया गया। इस नवाचारपूर्ण पहल को प्रदेशभर में व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। कमल रंगा ने बताया कि राजस्थानी करोड़ों लोगों की मातृभाषा है और इसकी संवैधानिक मान्यता न केवल भाषा की पहचान को सुदृढ़ करेगी, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, परंपरा और भावनात्मक एकता की संवाहक होती है। अब्दुल समद राही के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सोजत (पाली) के उपखंड अधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया। ज्ञापन में राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और उसे प्रदेश की राजभाषा का दर्जा देने की मांग की गई। बीकानेर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों से साहित्यकारों और समाजसेवियों ने उपवास रखकर समर्थन व्यक्त किया। इसके अतिरिक्त जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, नागौर, झुंझुनूं, जैसलमेर, अलवर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बूंदी, बांसवाड़ा, टोंक सहित अनेक जिलों से राजस्थानी भाषा समर्थकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
उपवास के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का यह आंदोलन प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा हुआ है और इसे जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि राजस्थानी भाषा की मान्यता से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
