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वसंत का महत्व संगीत साहित्य एवं कला के साथ आध्यात्मिक भी

वसंत का महत्व संगीत साहित्य एवं कला के साथ आध्यात्मिक भी
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान द्वारा आयोजित होने वाले दो दिवसीय वसंतोत्सव के प्रथम दिन सरस्वती स्तोत्रम् पाठ के साथ प्रारंभ हुआ। राजेश रंगा एवं तोलाराम सारण ने बताया कि पुजारी विजय कुमार छंगाणी के सानिध्य में विधि-विधान से मां सरस्वती को समर्पित उक्त 108 पाठ का पठन कर पूजन किया गया। इस अवसर पर कमल रंगा ने बताया कि वसन्त उत्सव जहां भारतीय संगीत, साहित्य एवं कला में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसी तरह इसका अपना आध्यात्मिक महत्व है। तभी तो कालिका पुराण में भी वसन्त का सुंदर वर्णन मिलता है। इस अवसर पर भवानी सिंह, हरिनारायण आचार्य ने भी वसंत के महत्व को रेखांकित करते हुए उसकी प्रासंगिकता बताई। संचालन आशीष रंगा ने किया।

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