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धर्म में पंच परमेष्ठी सर्वोपरि

धर्म में पंच परमेष्ठी सर्वोंपरी
बीकानेर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने बुधवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि जैन धर्म में पंच परमेष्ठी सर्वोंपरी है। पंच परमेष्ठी  का अर्थ पांच सर्वोच्च व पूजनीय, वंदनीय परमात्म तत्व अरिहंत परमात्मा, सिद्ध परमात्मा, आचार्य, उपाध्याय व साधु भगवंत है। जिनको नवकार महामंत्र में नमस्कार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि पंच परमेष्ठी की महान आत्माओं ने कर्मों को नष्ट कर पूर्णता प्राप्त करली और मुक्त व मोक्ष का मार्ग दिखाया, सर्व कल्याण का संदेश दिया है। ये जैन धर्म के सर्वोकृष्ट आदर्श है। इनको नमन करने से हमें उत्कृष्ट अवस्थाओं को प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है। इन्हें नमन से परमात्म भक्ति के साथ मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने की कामना बढ़ती है।
श्री जैन श्वेताम्बर भंडार तीर्थ पावापुरी, गौतम स्वामी गुणायामी तीर्थ जीर्णोद्धार समिति की ओर से श्री वीर गौतम आराधना 22 अक्टूबर 25 से शुरू होगी। इसमें ऑन लाइन पंजीयन करवाकर घर बैठे साधना आराधना व भक्ति कर 21 हजार से एक लाख 71 हजार रुपए तक का इनाम प्राप्त किया जा सकता है। खरतरगच्छ महिला परिषद की मंत्री लीला बेगानी ने बताया कि इसके लिए ऑन लाइन पंजीयन करवाना होगा। रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में लगे आराधना के पोस्टर से क्यू आर कोड को स्केन कर पंजीयन करवाया जा सकता है।

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