

पर्युषण पर्व का महत्वपूर्ण दिवस क्षमायाचना
बीकानेर। जैन महासभा बीकानेर द्वारा गंगाशहर तेरापंथ भवन में संपूर्ण जैन समाज का सामूहिक क्षमायाचना कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें तेरापंथ समाज से आचार्य श्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री कमलकुमारजी स्वामी और खरतरगच्छ श्रीसंघ से गणिवर्य मुनिश्री मेहुलप्रभ जी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।
मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण है और इसका सबसे महत्वपूर्ण दिवस क्षमायाचना का होता है। उन्होंने बताया कि इस बार श्वेतांबर समाज में अधिकांशतः चतुर्थी को संवत्सरी थी, जो आचार्य श्री महाश्रमण जी की उदारता का परिणाम है, अन्यथा चतुर्थी और पंचमी की अलग-अलग तिथियों के कारण एकता का वातावरण नहीं बन पाता। उन्होंने जैन महासभा के इस प्रयास की सराहना की कि पर्युषणों के बाद सामूहिक क्षमापना का आयोजन किया जाए, जिससे सभी एक साथ ’खमत खामणा’ कर सकें। कार्यक्रम में जैन महासभा के पूर्व अध्यक्ष विजय कोचर, चम्पकमल सुराणा, इन्द्रमल सुराणा, जयचन्दलाल डागा, जैन लूणकरण छाजेड़ व जैन समाज के अनेक सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन संगठन मंत्री जतनलाल संचेती ने किया। आभार ज्ञापन जयचंदलाल डागा ने किया।
