

सुख प्राप्ति के लिए पुण्य व पुरुषार्थ जरूरी
जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर ने बीकानेर की ढढ्ढा कोटड़ी में सोमवार को चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि संसार के समस्त जीव सुख अभिलाषी है। वे हर समय सुख की प्राप्ति चाहते है और दुःख मुक्ति का उपाय ढूंढते हैं।
उन्होंने कहा कि परमात्मा ने सुखी होने के लिए दो मार्ग बताए पुण्य और पुरुषार्थ । पुण्य शक्कर के समान है और इसका उपयोग पुरुषार्थ के समान है। पुण्य के साथ-साथ पुरुषार्थ जरूरी है। पुण्य से परमात्मा का शासन, धर्म मिला है, लेकिन पुरुषार्थ नहीं करें तो मिला हुआ धर्म हमें यथोचित फल नहीं देगा। परमात्मा की पूजा करने से चित्त हमेशा प्रसन्न रहता है। शुभ कार्य करने के लिए पुण्य की आवश्यकता रहती है। बिना पुण्य के एक भी शुभ कार्य मन में उत्पन्न नहीं हो सकता।
