

दुधारू ऊँटनियों के प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
बीकानेर। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर में ‘दुधारू ऊँटों का प्रबंधन और ऊँट डेयरी में उद्यमिता विकास’ विषयक पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (18–22 अगस्त) का शुभारंभ सोमवार को हुआ। केंद्र में चल रही पशु अनुवांशिक संसाधनों पर नेटवर्क परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण में झालावाड़, बारां, अलवर और भरतपुर जिलों के 10 ऊँट पालक भाग ले रहे हैं। इसमें दुधारू ऊँटों के प्रबंधन एवं डेयरी आधारित उद्यमिता विकास के विभिन्न पहलुओं जैसे, प्रजनन एवं चयन पद्धति, आंकड़ा, उष्ट्र स्वास्थ्य, चारागाह प्रबंधन के अलावा दूध का प्रसंस्करण एवं विपणन तथा दुग्ध उत्पादों का निर्माण एवं उद्यमिता विकास योजनाओं की जानकारी विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुख्य अतिथि श्री रमेश कुमार ताम्बिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने ऊँट पालकों के समक्ष नाबार्ड की योजनाओं का उल्लेख करते हुए एफपीओ और संयुक्त देयता समूह जैसे संगठन बनाने पर बल दिया, जिससे ऊँट उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर उन्हें बाजार तक पहुँचाया जा सके। उन्होंने एनआरसीसी द्वारा पिछले लगभग दो दशक से सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे उष्ट्र दुग्ध पार्लर तथा इनमें बिक्री हेतु रखे जाने वाले स्वादिष्ट दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग का उल्लेख किया। श्री ताम्बिया ने अपने व्याख्यान में उष्ट्र दुग्ध उद्यमिता में नाबार्ड के विभिन्न योजनाओं संबंधी विस्तृत जानकारी देते हुए ऊँटपालकों को इन योजनाओं से जुड़ने हेतु प्रेरित किया।
