

काव्य रंगत-शब्द संगत की ग्यारहवीं कड़ी संपन्न
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा अपनी मासिक साहित्यिक नवाचार के तहत प्रकृति पर केन्द्रित ‘काव्य रंगत-शब्द संगत‘ की ग्यारहवीं कड़ी लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन नत्थूसर गेट बाहर संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि आग प्रकृति का एक महत्वपूर्ण स्वाभाविक उपक्रम है। काव्य ने वस्तुतः आग के अर्थ और भाव का अंतर्जगत तक वृहत विस्तार कर दिया है, जहां विभिन्न मनोवृतियां आग के बिम्ब में अभिव्यक्त होती रही है। जो कुछ अर्थो में हमारे स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। साथ ही मानव की गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन का भी एक कारक है, जिसे कवि ने हमेशा अपनी सृजनधर्मिता से कई आयाम दिए है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती इन्द्रा व्यास ने कहा कि नवाचार का नाम ही प्रज्ञालय संस्थान है। संस्थान द्वारा नगर की समृद्ध साहित्य परंपरा को नई ऊंचाईयां देने के लिए समर्पित भाव से निरन्तर आयोजनरत है। जिसके लिए संस्थान साधुवाद की पात्र है। प्रकृति पर केन्द्रित बारह कडियें का आयोजन अपने आप में महत्वपूर्ण है।
इस महत्वपूर्ण काव्य संगत में डॉ. नृसिंह बिन्नाणी, जुगल किशोर पुरोहित, गिरिराज पारीक, यशस्वी हर्ष, हरिकिशन व्यास, मदन गोपाल व्यास ‘जैरी’, युवा कवि आनन्द छंगाणी आदि ने अपनी आग पर केन्द्रित गीत, कविता, ग़ज़ल, हाइकू एवं दोहों से सरोबार इस काव्य रंगत में शब्द की शानदार संगत करी।
