Bikaner Bikaner District Rajasthan

आपदाओं की रोकथाम की आवश्यकता पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित

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आपदाओं की रोकथाम की आवश्यकता पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित
बीकानेर। जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के विशेष आपदा अनुसंधान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से सतत जीवनशैली अपनाने और आपदाओं की रोकथाम की आवश्यकता पर शोध उत्थान करना था। कॉन्फ्रेंस के अंतर्गत हुए सम्मेलन और पॉडकास्ट सत्रों में भारत के कई कोनों और विदेशों से विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और अनुभवी व्यक्तियों का आगमन हुआ। मुख्य विषयों में गुरु जंभेश्वर जी की जीवन-दृष्टि को समझकर सतत विकास का ढांचा तैयार करना, आपदा जोखिम को कम करने में पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों की भूमिका, तथा बिश्नोई समुदाय जैसे सामाजिक समूहों द्वारा जैव-विविधता संरक्षण, आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलता हेतु अपनाए गए तरीकों की समीक्षा शामिल रही।
कार्यक्रम में डॉ. दीप नारायण पांडेय (सहायक प्रोफेसर, विशेष आपदा अनुसंधान केंद्र, जेएनयू), प्रो. (डॉ.) इंद्रा बिश्नोई (अध्यक्ष, जांभाणी साहित्य अकादमी) डॉ. पुष्पा कुमार लक्ष्मणन – निदेशक, विधि महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय), श्री एल.आर. बिश्नोई (सेवानिवृत्त आईपीएस; पूर्व डीजीपी, मेघालय),डॉ. एम.के. रंजीतसिंह (सेवानिवृत्त आईएएस; पूर्व निदेशक, भारतीय वन्यजीव संरक्षण), राज कुमार भाटिया (विधायक, दिल्ली) विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में अकादमी के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष डॉ बनवारीलाल सहू, अकादमी के राष्ट्रीय संगोष्ठी संयोजक डॉ सुरेन्द्र कुमार, साहित्यकार डॉ कृष्णलाल बिश्नोई, पर्यावरणविद् इंजि. आर के बिश्नोई, डॉ मनमोहन लटियाल, डॉ जगदीश बिश्नोई, डॉ कृपाराम,डॉ स्वाति बिश्नोई, डॉ मीना रानी, डॉ महेश धायल,डॉ भंवरलाल उमरलाई, अन्नू लाल, डॉ भजनलाल, पर्यावरण सेवक श्री खम्मूराम,मास्टर गोरधनराम बांगड़वा, अनिल भांभू, विनोद कड़वासरा,विनोद काकड़,अशोक पंवार, सहीराम गोदारा आदि लोग उपस्थित रहे।

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